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आप मानेगें।
शायद नहीं....
लेकिन ऐसा हैं या यु कहुं कि electrostatic कै एक बेसिक रुल ही हमें ऐसा महसुस करवाता हैं.........
जरा सोचो तुम्हारे पास एक electric wire हैं
इसके अन्दर proton हैं electron हैं यानि इसके पास जिरो चार्ज हैं मतलब की
number of proton=number of electron
तो जब चार्ज equal है तो भाई कोई फार्स कैसे लग सकता हैं..
सही कहा नही लग सकता इस ही लिऐ खाली पडे तार मे बिजली चालू नही होती
लेकिन अब तुमने उस मैं एक बैटरी जोड दी
बस अब यही से वो incident शुरू होगा जो बाद मैं बडी बडी मशीनो का अधार बन गाया जिसको हम साइंस की भाषा मैं बोलते हैं
ELECTROMEGNETISM
लेकिन इस से पहले मेरा सवाल एक बार और सुन लो
Moving charge magnetic field क्यों Generate करता हैं?
अब जरा ध्यान दो तुमने एक वायर लिया। जब उसके अन्दर कोई बैटरी नही जोडी तो उसके electron protonकुछ यु थें
लेकिन जब तुमने बैटरी जोड दी तब....?
लेकिन यहीं Lorentz length construction अपना रोल प्ले करता हैं और तेज गाति के कारण electron river की लेन्थ को सिकोड देता हैं कुछ ऐसे
इस लिऐ पहले जो चार्ज डिट्रिब्युशन कुछ ऐसे था
अब वो बदल कर ऐसे हो जाता हैं
यानि पहले अगर proton और electron समान थे वो अब ज्यादा हो गये ...... यानि की चार्ज का excess हो गाया .......... और जहां भी extra charge होगा वो repulsive या attractive फोर्स तो लगायेगा ही ना भाई.......
अब वो बदल कर ऐसे हो जाता हैं
यानि पहले अगर proton और electron समान थे वो अब ज्यादा हो गये ...... यानि की चार्ज का excess हो गाया .......... और जहां भी extra charge होगा वो repulsive या attractive फोर्स तो लगायेगा ही ना भाई.......
यहीं फोर्स दुसरे मुविगं चार्ज को महसुस होता हैं और इस फोर्स को ही हम magnetic फोर्स कहते हैं ....
क्या कहां ऐसा होना possible नहीं.हैं...
क्यों..?
क्योकि तार के अन्दर तो इलैक्ट्रान dirft velocity से चलते हैं और वो तो बहुत कम होती हैं लगभग 0.025मीं/सें तो इतनी कम गति में Lotentz length con. कैसे लग सकता हैं वो तो बहुत तेज गति में लगता है ना..?
किसने कहां की व़ो तेज गति में ही काम करता ह़ै जरा
L=L'[√1+V²/C²]
क्या कहां ऐसा होना possible नहीं.हैं...
क्यों..?
क्योकि तार के अन्दर तो इलैक्ट्रान dirft velocity से चलते हैं और वो तो बहुत कम होती हैं लगभग 0.025मीं/सें तो इतनी कम गति में Lotentz length con. कैसे लग सकता हैं वो तो बहुत तेज गति में लगता है ना..?
किसने कहां की व़ो तेज गति में ही काम करता ह़ै जरा
L=L'[√1+V²/C²]
को 0.025m/s कै लिऐ लगा कर तो देखीये रिजल्ट क्या आता हैं
L'=0.9999652771m
और.हमारी original length क्या थी
L=1m
That is L-L'=0.000034733=3×10^-5
यानि एक इलैक्ट्रान रिवर अपनी लेन्थ में 0.000003मी कम हो गई हैं अब ये तो तुम जानते ही होगें ना कि atomic level पर ये डिस्टेनस कीतना बडा हैं सिर्फ 0.000003मी खीसकने से ही हजारो चार्ज पार्टिकल का बैलन्स डिस्टर्ब हो जायेगा...1 meter मैं 7.8×10^9 copper atom होते हैं जो चार्ज बैलेन्स होते हैं यानि हर 0.000001 मीं मैं 7.8×10^3 ........ इसका मतलब समझे..........
अब तुम खुद देख सकते हो कि कैसे सिर्फ एक छोटा से चैन्ज कितना बडा असर डालता हैं हमारे अटोमीक लेवल पर...
अगर फ्रि चार्ज की स्पीड वायर मैं 0.00000006 मीं/सें भी होती तो भी ये थ्योरी आफ रिलेवीटी को 100% फोलो करता..
अब जो extra charge वायर मैं लेन्थ के सिकुडने की वजह से आया हैं वो चार्ज ही आपने बगल से गुजर रहे दुसरे चार्ज पर फोर्स लागयेगें..मतलब मैग्नेटीक फोर्स...
अब समझ आया
L'=0.9999652771m
और.हमारी original length क्या थी
L=1m
That is L-L'=0.000034733=3×10^-5
यानि एक इलैक्ट्रान रिवर अपनी लेन्थ में 0.000003मी कम हो गई हैं अब ये तो तुम जानते ही होगें ना कि atomic level पर ये डिस्टेनस कीतना बडा हैं सिर्फ 0.000003मी खीसकने से ही हजारो चार्ज पार्टिकल का बैलन्स डिस्टर्ब हो जायेगा...1 meter मैं 7.8×10^9 copper atom होते हैं जो चार्ज बैलेन्स होते हैं यानि हर 0.000001 मीं मैं 7.8×10^3 ........ इसका मतलब समझे..........
अब तुम खुद देख सकते हो कि कैसे सिर्फ एक छोटा से चैन्ज कितना बडा असर डालता हैं हमारे अटोमीक लेवल पर...
अगर फ्रि चार्ज की स्पीड वायर मैं 0.00000006 मीं/सें भी होती तो भी ये थ्योरी आफ रिलेवीटी को 100% फोलो करता..
अब जो extra charge वायर मैं लेन्थ के सिकुडने की वजह से आया हैं वो चार्ज ही आपने बगल से गुजर रहे दुसरे चार्ज पर फोर्स लागयेगें..मतलब मैग्नेटीक फोर्स...
अब समझ आया
अगर मुविगं चार्ज अपनी स्पीड कम कर दे तो Lorentz length construction की value भी कम हो जायेगी मतलब अब.जो.extra charge वो फील कर राहा वो कम हो जायेगा और इस वजह से उस पर लगने वाला relaitiv electrodynamic force भी जिसे हम लोग magnetic फोर्स भी कहते है
वो extra force ही.एक मुवीगं चार्ज फील करता हैं ........
क्योकि वो चार्ज जिस फ्रेम म़े मोशन कर राहा हैं ये सब कुछ उस फ्रेम के लिऐ ही हुआ हैं तुम्हारे फ्रेम मैं तो अब भी proton और.e electron आपस में बारबर हैं
- असल मैं तो electric feild और magnetic feild एक ही चीज है कोई अलग अलग नही हैं अगर आप Moving frame of reference में है तो एक magnetic feild देख रहे होगें। और अगर आप stationary frame of reference में हैं तो आप एक electric feild देख रहे होगें.......
समझे.।।।।।।
वैसे एक विडीयो भी बनाई हैं इस बारे मैं देखना चाहो तो देख सकते हो तुम....Play video
..........लेकिन एक सवाल और पुछना था यार
यें चार्ज होता क्या हैं......मतलब ऐसा चार्ज मैं क्या होता है की यें अपने जैसे चार्ज को दुर फैकता हैं और विपरीत चार्ज को पास खीचतां हैं......।।।।। उस को कैसे पता चलता हैं की सामने वाले को पास खीचना हैं या दुर फैकना हैं
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हम ये article Like👍 के लिऐ नही लिखतें..... हम बस लिखते हैं ताकि जिन सवालो का जवाब हमें मथापच्ची कर के ढुढना पडा उनका जवाब आपको factual तरीके से एक scientific रूप से मिले...... लेकिन ये आपकी भी जिम्मेदारी है कि इस ज्ञान.को बाटें............. अपने दोस्तो को टैग करके, लिंक भेज कर, व्हाटस्एप्प मैसिज करके या किसी भी तरीके से आप उनकी भी. knowledge बढायें.....
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