Thursday, 26 October 2017

Physical world: unity in diversity


The science stream junction™ published

अकसर हम जब भी अपने आस पास हो रही गतिविधियों को देखते हैं तो एक जीज्ञासा भरे भाव से हम उन कारणो को खोजते हैं जिस की वजह से हम ये समझ और जान पाये कि वो घटना क्यों घटी और इसका प्रभाव क्या होगा. किसी भी भौतिकीय घटनाक्रम के पीछे कई कारण छुपे होते हैं लेकिन इस समय हम अपनी चर्चा को केवल एक विज्ञान कि आधारभुत  शाखा तक ही सिमीत रखेगें.
        एक उदाहरण देखते हैं अगर कभी आपको घर का घरेलु बिजली के उपकरण को ठीक करते वक्त या अन्य किसी कारण से कभी बिजली का एक झटका लगा हो और यदि आप ये सोचे कि क्यो आपको ये झटका लगा और कैसे?
        अगर आप ऐसा सोचे तो आप विज्ञान की बडी ही रोचक यात्रा पर निकल पडेगें और हजारो सवाल के जवाब पाते हुऐ आप देखेगें कि कैसें इस दुनिया मे होने वाली सारी घटनायें विज्ञान की सूक्ष्म दुनिया से जुडी है और उस सूक्ष्म दुनिया के अपना अलग ही काम करने का तरीका हैं
        अपनी चर्चा को हम एक बार हो सिमीत करते हुऐ अभी के लिऐ इसे वस्तुओं की.संरचना के आधारभूत कारको तक रखते हैं
        कल्पना किजीऐगा कि आपके पास एक ऐसा महाशक्तिशाली सूक्ष्मदर्शी हैं जो इस ब्राह्मण में उपस्थित सुक्ष्म से सुक्ष्म वस्तु को
चित्र 1: ग्रेफाइट से बनी पेन्सिल की नोक

आपको दिखा सकता हैं और उत्साहवश आपने वो सुक्ष्मदर्शी एक ग्रफाईट के टुकडे पर केन्द्रित कर दिया                        
         अब आप धीरे धीरें सुक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता( सुक्ष्मता से देखने की क्षमता) बढा रहे हैं
        इस सुक्ष्म जगत को देखने की अभी आपकी यात्रा शुरू हि हुई हैं लेकिन अभी आपको एक रोचक तथ्य दिखाई दिया.
        जिस सग्रफाईट को आप बडा ही चिकनी सतह का समझ रहे थे वास्तव में वो तो एक उबाडखाबड सतह हैं जिसको मुलायम तो कदापि नही कहा जा सकता. जगह जगह गढ्ढे और स्पंज अकार की आकृति आपको ये भुला देगी की आप ग्रेफाइट को देख रहें हैं...
चित्र 2: ग्रेफाइट का सुक्ष्मदर्शी से चित्र

        सूक्ष्मस्तर पर इस प्रकार की आकृति के कारण ही इन कुछ चिकनी सतह जैसे दिखने वाले वस्तुऔ पर भी छिपकली और मच्छर जैसे जीव बडी अराम से चल पाते हैं क्योकीं उनके पैरो पर भी इस ही प्रकार की सुक्ष्म प्रकार की संरचना होती हैं जो बडी आसानी से उन खाचों में फीट हो जाती हैं

      अब आगे की यात्रा का विवरण देखीये आवर्धन क्षमता और बाढाईये अब आप का दुसरा अनुमान टुटेगा जिस ग्रेफाइट को आप एक ठोस पत्थरनुमा संरचना समझ रहे थे वो तो वास्तव में कई परतो का मेल जोल हैं अब उन परतो के बीच का रिक्त स्थान भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता हैं इसकी संरचना इस प्रकार की है मानो कई सतह क़ो एक के ऊपर एक रख कर इसे गढा गाया हो.
चित्र 3: 0.0001मीटर की सुक्ष्मता

      और अधिक अन्दर जाने पर हर परत की संरचना अलग अलग नजर आती हुई जायेगी
      यहां से आप किसी एक परत पर अपनी सुक्ष्मदर्शी को केन्द्रित करें आपने अब क्या देखा?

प्राकृतिक सुन्दरता का अद्भुत नजारा आप पायेगें कि बहुत सारे पष्टभुज आपस में जुडे हुऐ हैं एक लकीर के द्वारा और ये लकीर क्या हैं ये लकीर है दो कार्बन परमाणुऔ के बन्ध जिसे आपने हाईस्कूल रसायन में पढा होगा....

इस स्तर पर आप कार्बन के परमाणुऔ और उनके बन्ध आप देख सकते हैं चित्र में जैसे स्पष्ट हैं कि आप बडी आसानी से ये सब पता कर सकते हैं कि कौन सा बिन्दु क्या है. अब अगर आपको आगें कि यात्रा जारी रखनी हैं तो आपक़ो अब भौतिकी के कुछ सिध्दान्तो को पालन करना होगा क्योकि सुक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता आप इस स्तर से अधिक नही बढा सकते

और ज्यादा नजदीक जाने पर आप सिधा परमाणु के पास चले जायेगें लेकिन सम्भवतः ये ही वो स्तर हैं जब आपकी सबसे ज्यादा कल्पना टुटेगी

लेकिन रूकिये...क्या आप जानते हैं कि परमाणु दिखता कैसा हैं हम मे से अधिकतर ने पहली बार परमाणुऔ संरचना से आधिकारिक परिचय 9वीं कक्षा मे पाया होगा और जिस आकृति को हमें परमाणु कीं संरचना बताया गाया वो आकृति निम्न हैं
इसके अनुसार परमाणु के अन्दर एक कैन्द्रक है और चारो और इलैक्ट्रान उस कैन्द्रक कि परिक्रमा कर राहा हैं इस कैन्द्रक और इल्कट्रोन के मेल को ही परमाणु कहते हैं
ये संरचना स्केल पर आधारित नही होती आर्थत यह नाभिक और इल्कट्रोन के उस वास्तविक आकार को प्रदर्शित नही करती जिस अकार के वो वास्तव में हैं अगर आप इसे चित्र आनुसार मापने कि कोशिश करें तो यह ................ पर क्या आप अनुमान लगा सकते है कि वास्तव में इनका अनुपात क्या होगा.
कल्पना किजीऐगा...!
अगर आपका नाभिक एक गेहुं का दाना हो और आपका इलैक्ट्रान एक सुई की नौक तो यह माडल इतना बडा होगा जितनी फुटबॉल के मैदान के बीच में गेहूँ रखा हो और दर्शकदीर्घा के बीच में सुईं. निश्चित हि यह एक विशाल अन्तर है जो कम से कम प्रकेटिकल बुक के कवर पेज पर तो प्रदर्शन नहीं किया जा सकता.

    इस स्तर पर ये फर्क नही पडता कि आप मिट्टी , काचँ, हाइड्रोजन, पानी या किसी अन्य चीज के परमाणुऔ देख रहे हो सभी परमाणुऔ का रूप समान ही होगा अगर अन्तर होगा तो केवल नाभिक के अकार और चारो और चक्कर काट रहे इल्कट्रोनो कि संख्या पर इस स्तर पर केवल ये दो कारक ही ऐसे होगें जिन के अधार पर आप यह बता पायेगें कि कौन सा परमानु किस तत्व का है
    अब आप और करीब गयें और अब आप परमाणु के नाभिक तक पहुचं गये हैं यहां आप देखेगें कि कैसें परमाणु का नाभिक दो तरह के कणों से मिलकर बना हैं लेकिन आप यह पता नही लगा पायेगें कि कौन सा कण क्या हैं अपने भौतिकी के प्रयोग के अधार पर हम जानते हैं कि परमाणु के नाभिक में प्रटोन और न्युट्रोन नाम के दो कण होते हैं भौतिक स्तर पर आवेश के सिवा ऐसा कोई और कारक नही है जिससे हम ये बता पाये कि ये कण प्रटोन(धनावेशित)हैं और ये कण न्युट्रोन (उदासीन) नाभिक जैसी छोटी सी जगह में ये दोनो कण आपस में गुत्थे हुऐ रहते हैं और नाभिक को एक बहुत ही सघन संरचना बना देते हैं लेकिन क्योकिं नाभिक बडी ही छोटी जगह मैं बहुत सारे धनावेशित कणों को रखता हैं तो कुलाम के नियमानुसार वो सभी समान रूप के आवेश आपस में प्रतिकर्षण होने चाहिऐं. तो फिर नाभिक स्थाई कैसे रह जायेगा.
    रोचक तथ्य यह है कि अभी आप जिस स्तर पर हैं वहां पर कुलाम का नियम काम नही करता क्योकि कुलाम के बल से भी ज्यादा शक्तिशाली बल उस दुरी पर मौजुद होता हैं जिसे स्ट्रोगं फोर्स कहते हैं ये बल इतना अधिक शक्तिशाली होता हैं कि  आवेश के बल को प्रभाव को लगभग क्षीण कर देता हैं
    नाभिक और उसके इल्कट्रोन यहां दोनो कुल मिलाकर परमाणु के पुरे आयतन का एक बहुत छोटा हिस्सा ही खेर पाते है क्योकि अधिकांश आयतन रिक्त होता हैं अगर गणना कि जाये तो मात्र 0.01% जगह ही इल्कट्रोन और प्रटोंन से भरी हुई होती हैं बाकि जगह रिक्त आकाश होती हैं आर्थत आपके शरीर का लगभग संपूर्ण भाग खाली हैं मात्र 0.01% ही आप हैं
    और अधिक सुक्ष्मता से देखने पर हमें ये चुनाव करना होगा कि हमें सूक्ष्मस्तर पर इन दो( प्रोटोन और न्युट्रोन) कणो में से किस कि पडताल करना चाहते हैं हम चाहें तो अलग अलग कर के भी दोनो कणो को देख सकते हैं लेकिन इससे कोई ज्यादा फर्क नही पडता क्यों.?
    वास्तव में प्रोटोन और न्युट्रोन दोनो एक ही तरह के कम्पोजिट कण है जो क्वार्क कणो से मिल कर बने हैं अन्तर मात्र इतना हैं कि प्रोटोन मे एक डाऊन क्वार्क और दो अप क्वार्क  होते हैं और न्युट्रोन में दो डाऊन क्वार्क और एक अप क्वार्क होता हैं( क्वार्क कण मुलभुत कण होते हैं जिंंन से मिलकर अन्य कम्पोजिट कण बनते हैं यह ऊर्जा के बढते क्रमानुसार छ: प्रकार के होते हैं )
आर्थत आप दोनो में से किसी भी कणो को देख रहे हो इसका कोई अन्तर नही पडता.
    मान लेते है कि हम प्रोटोन को देखते हैं जिस समय आप प्रटोन को देख रहे होगें आप एक नयें नियमों का संसार पायेगें आपके एक नये तथ्य से परिचय होगा कि आवेश मात्र प्राकृतिक संख्या के रूप में ही नही पाया जाता अपितु यह मुलभुत रूप से भिन्न संख्या के रूप में होता हैं(अप क्वार्क में 2/3 और डाऊन में -1/3)  क्वार्क कण बडे ही रोचक प्रकार का व्यवहार करते हैं जिन्हे कुछ नियम व परिकल्पना को ध्यान मे रख बडे ही अराम से समझा जा सकता हैं लेकिन अपनी अनोखी सुक्ष्मदर्शी का प्रयोग करते हुऐ हम ग्रेफाईट के इतनी गहराई तक जा पहुचें हैं कि यहां पर कोई भिन्नता किसी भी प्रकार से रह ही नही जाती भिन्नता मात्र अप और डाऊन क्वार्क तक सिमीत होकर रह गई हैं और इस स्तर से आगे का अवलोकन उन नियमों को अधार मान स्पष्टता से नही किया जा सकता जो अनन्त: हमारे इस लेख कि सिमा को बाधित करता हैं
    लेकिन जो भौतिक जगत ऊपरी रूप से हमें इतनी अधिक भिन्नता लिऐ दिखाई देता हैं जिसमें 117 प्रकार के तत्वो का अलग रूप रंग और प्रकार हैं सैकडो प्रकार के रंग हैं जिनसे इस संसार को हम देखते हैं अलग अलग प्रकार के विज्ञान हैं जो इस ब्रहमाण्ड के कार्य करने के प्रकार को हमे समझाते हैं ये सभी इस स्तर पर अलग अलग दिखाई देने वाली चीजें कितनी अधिक भिन्न दिखाई देने वाली चीजे और नियम अपने मुलभूत स्तर पर कितने सरल दिखाई देते हैं शायद विज्ञान का एक अनकहा नियम ये भी हैं कि आप जितना इसमें गहराई में उतरते जायेगें उतना ही अधिक यह अपने भिन्नता में एकता लाता जायेगा.




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