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■■■अंधेरे से हम क्यो डरे?■■■
कहते है अधुरा सच पुरे झुठ से भी ज्यादा खतरनाक होता है पता नही इतने पते कि बात किसने बोली होगी पर बात मे दम बहुत है,
.अक्सर होता क्या है कि हम उन चिजो से उतना नही डरते जिनके बारे मे हम कुछ नही जानते बल्कि जिन चीजो के बारे मे हमारी जानकारी आधी आधुरी होती है वो चीजे हमे ज्यदा डराती है
Well जहां डरने डराने कि बात आती है वहां मानव मसतिष्क सबसे पहले जो छवि बनाता है उसमे कही ना कही अन्धकार कि एक बडी जगह होती है मानव सदा अन्धकार से भयभीत होता आया है कुछ तीस मार खाँ ऐसे भी होते है जो ये दवा करते है कि वो अन्धेरे से नही डरते.................... अब वो सच बोलते है या झुठ ये तो राम जाने भाई पर स्टडी ये बोलती है कि लगभग हर इंसान कि दिल कि धडकने अधेरें मे बढ जाती है
इस अन्धकार का इस्तेमाल कई होलीवुड और बोलीवुड कि भुतिया फिल्मो मेँ डर पैदा करने मे किया जा चुका है और yes we get afraid...............
लेकिन जिस डर को हम डर समझते है in real life वो हमारे दिमाक कि हमारे शरीर को high security सुरक्षा देने का तरीका है
जब हम अन्धेरे मे होते है तो हम कुछ देखने मे असर्मथ हो जाते है तब क्योकि हमारी आँखे तो आने वाले खतरे भापँ नही सकती that's why हमारा दिमाक हर छोटे से छोटे शोर को बडे ध्यान से सुनता है naturally हमारी गति कम हो जाती है मतलब कि हम बडे सावधान हो कर बडी मजबुती से अपने पैर टीका टीका कर चलते है
अब इन सब कमो को करने के लिऐ कुछ extra ऊर्जा चाहिऐ होती है और भाई हमारे.शरीर कि माँसपेशीया तो oxygen से लेती है energy और ये oxygen मिलती है blud से।
और खून दिल पम्प करता है ज्यदा oxygen कि जरुरत का मतलब ज्यदा तेजी से पम्प...................... जो हमारी धडकनो को बढा देता है। और हमे लगता है कि हम डर रहे है
कई लोग दुसरी तरह के होते है जो फिल्मो और काहानियो कै अधार पर ये मान लेते है कि अधेरे से किसी राक्षस या भुत का अधजला हाथ बहार आयेगा और हमे खीचं कर अन्दर ले जायेगा........।।।।।। दरअसल सारा का सारा खेल हमारी सोचने कि शाक्ति का है कि हम कितना गहरा और किस अधार पर सौचते है ...................।।।।।।। कई ऐसे भी लोग है जो सुनी और अन्धकारमय गुफा अकेले पार कर जाते है और कई ऐसे भी होते है जो अपने कमरे के स्टोर मे जाते हुऐ भी काम्प जाते है ऐसे लोग जो समझते है कि darkness is there enemy वो लोग निचे वाली कुछ लाईने जरा गौर से पढे
हम लोग अं्धेरे से डरते है क्यों? इसलिऐ कि उसमे कुछ दिखाई नही देता! अच्छा ये सोचो कि अनँधेरे मै कुछ नहीं दिखता इसमे मानव शरीर कि गलती है या प्रकृति की?
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इसमे गलती मानव शरीर कि है जो जगह आपको अन्धकारमय लगती है ठीक वो ही जगह किसी को प्रकाश से जगमागती हुई दिखती है जैसे कि चमगादड़,
आपको याद होगा ओसामा बिन लादेन को मारने के लिऐ जब नेवी सील कमांडो ने आपरेशन किया था तो उन्होने एक खास तरह के चशमो का युज किया था जिसे नाईट विजन गोग्लस कहते है ये चीज आपने मैन vs. वाईल्ड मे भी देखी होगी जब बेयर गिल्स रात को शुटिगं करता है जो हरा हरा सा दिखता है
अब मैन मुद्दे पर आते है असल मै हम अन्धेरे मे देख नही सकते इसका मतलब ये नही की वहा प्रकाश है ही नही दरअसल वहा प्रकाश है लेकिन वो उन सीमाऔ के परे है जहा तक हमारी आखे देख सकती है ........
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असल मै प्रकाश बहुत सारे energy packet से मिलकर बना होता है जैसे चिप्स कै पैकेट होता है ना ठीक वैसा ही .................. बस उसमे चिप्स कि जगह energy भरी होती है और इस तरह कै पैकट हम बोलते है """photon""" .
अब ये जो हमारी आंखे बनी है ये सिर्फ वो फोटोन देख सकती है जो visible rang मै हों.। इसका मतलब पता है क्या हुआ? ............।
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इसका मतलब होता है कि हमारी आखे लगभग 1 स्पटीट्रलियन मै से( 1septillion=1,000,000,000,000,000,000,000,000,000) मे से सिर्फ 1 फोटोन देख सकती है मतलब कि अगर अधेरे मै भी प्रकाश अनगीनत फोटोन होते है और अगर उसमे से सिर्फ एक फोटोन कि कमी रह जाय तो हमारी आखो के आगे कि बत्ती गुल हो जाती है............
देखा nature के सामने कितने बोने है हम!
Well अगर आप अंधेरे से डरते है तो साहब आप सिर्फ एक फोटोन ना होने के चलते एक स्पट्रिलयन
फोटोनस को इग्नोर मार रहे है and that is not a nice job.
चलो चलते चलते एक और जानकारी आपको देते जायें.
इस दुनिया मे एक ऐसा भी इन्सान था Monet may नाम का जीसके पास ऐसी आखे थी जो अधेरे मे भी देख सकती थी उसकी एक आँख नार्मल थी और दुसरी ऐसी कि वो आल्ट्रावोईलेट किरणे भी देख ले, .........
थैक्स &
खोज.....ते। रहोहोहोहो.