Monday, 30 January 2017

Nagasaki ATOMIC bomb attack

The science stream junction™ published

   •••••• नागासाकी: परमाणु बम•••••••

    मानवता के इतिहास का शायद.सबसे खौफनाक लम्हा था जब इन्सान ही इन्सान को निगल गाया...ना जाने कितने लोग  कितने लोग पलक छपकते ही जहा थे वहा के वही.ही जम गये और  सिर्फ एक पल भर में लीऐ गये फैसले से कुछ लोगो को जिन्दगी भर के जख्म मिल गये.........।।।

            9 अगस्त 1945...........   अभी अभी तीन दिन पहले दुनिया ने देखा था कि कैसे हिरोशिमा को सेकण्ड के दसवे हिस्से में एक छोटे से बम जिसका नाम    little boy.    था ने जमीन से गायब कर दिया था हजारो लोग मारे गये थे और लाखो बाद मे मरे आज तक किसी भी युध्द में सिर्फ एक हथियार से इतनी तबाही नहीं हुई थी जितनी इस बार हुई   लेकिन कहानी अभी बाकी थी

      9अगस्त की रात सुबह के दो बजे जापान से 2,500 km. दुर tinian नाम का एक द्वीप अमेरीका ने कुछ दिन पहले ही इसे जापान से जीता था और इस ही iland की धरती से जापान को दोबारा दहलाने के लिऐ कदम ऊठाये जा रहे थे

Tinian Airbase पर अमेरीका के चार जहाज इकट्ठे हुये , जिसमें से एक प्लेन weather conditions को जानने के लिऐ था और बाकि तीन जापान के नागासाकी शहर को मटीया मेट करने के लिऐ

अमेरिका इस समय बहुत ज्यादा दबाव में था जापान ने आपना साम्राज्य बहुत ज्यादा बढा लिया था और लगभग पुरे eastern Aisia पर जापान का कब्जा था
अभी हाल ही मैं जापान ने पार्ल हर्बल पर बम बरसा लगभग 2,500 हजार अमरिकी सैनिको की जान ले ली थी और अब अमेरिका पर ये दबाव आ गाया था की वो जापान को घुटने टेकने पर मजबुर कर दे

अमेरिका के तीन जहाज   ग्रेट आर्टिस्ट, बिगस्टिन और बोक्सकार  ये वो तीन जहाज थे जो जापान को तबाह करने वाले थे

सुबह 2 बजे ये तीनो प्लेन ऊडान भर कर जापान की तरफ रावाना हुये सुरक्षा कारणो से इन तीनो ने अलग अलग रास्ता अपनाया और तय हुआ की जापान के    yakushima  island पर दोबारा मिला जायेगा 

अब जापान की तबाही हवा में गोते लगाते हुये उसके करीब आ रही थी

अमेरीकी  सेना को पहला टारगेट   कोकुरा  दिया गाया था और दुसरा टारगेट नागासाकी  और ये साफ चुनौती दि गई थी की सिऋ्फ तब.ही बम छोडे जब टारगेट साफ साफ दिखाई दे राहा हो

यकुशीमा पर दो प्लेन बाक्सगार और ग्रेट आर्टिसट पहुच गयें और तीसरे प्लेन के इंतजार में यकुशीमा के ऊपर चक्कर लगाने लगे जब ये प्लेन चक्कर लगा रहे थे तभी चौथा प्लेन जो मौसम का माप राहा था फर्स्ट टारगेट कोकुरा के ऊपर से गुजरा.......

तुरन्त जापान के शहर कोकुरा में साइरन बज ऊठा लोग भाग कर शेल्टर में छुपने लगे लेकिन ये सिर्फ एक वेदर प्लेन था तो ये वार्निग वापस ले ली गई

ऊधर तीसरे प्लैन का इंतजार कर रहे दो प्लेन को चक्कर लगाते हुये 40 मिन्ट हो चुके थे और बिगस्टिगं का कोई नामो निशान नही था ईधन खत्म हो राहा था अब ज्यादा देर रुकना सही नही समझा गाया और दोनो प्लैन तीसरे प्लेन के बिना ही कोकुरा तक उठने लगे

लेकिन जब ये दो प्लेन कोकुरा के ऊपर पहुचे तो नाजारा बदला बदला सा था एक घण्टे पहले जो मौसम साफ था अब वोही बादलो से ढक चुका था प्लैन नीचे की शहर को नही देख सकते थे और ऊपर से ये सख्त आर्डर था कि तब तक अटेक ना हो जब तक टारगेट दिखाई ना दे

दोनो प्लेन ने कोकुरा के तीन चक्कर लगाये लेकिन कोई भी टारगेट को देख नही पाया क्रु की मुसीबते बढ गई उनके पास सिर्फ 5,000 गैलेन फ्युल बचा था और उन्हे वापस 2,500 km. भी जाना था 

फैसला.किया गाया.कि नागासाकि पर बम गीराया जायें

   नागासाकी जो कोकुरा से 125किमी. दुर था और ज्यादा अबादि वाला शहर था बस कुछ ही देर में तबाह होने वाला था

जब प्लेन शहर के ऊपर पहुचें तो यहां भी बादल छाय हुये थे और टारगेट नजर से परे था इस condition में प्लेन को बिना बम गिराये वापस लौटना था और अगर ऐसा होता तो नागासाकी तबाही से बच सकता था

             पर क्रु के पास सिर्फ इतना ईधन था की वो वापस लौट सके वो भी तब जब वजन को कम कर दिया जाये...........और वजन कम होने का सिर्फ एक तरिका था .............बम को छोडना

    जब क्रु को कोई और रास्ता नही दिखा तब फैसला हुआ की बम को रडार के अन्दाजे से छोडा जाये....

 अब भी ये सम्भव था की कुछ गलती हो जाये और बम समंदर मे जा गिरे  लेकिन इस समय बम को हर हाल में ड्रोप करना था 

बम के गेट खोल दिये गये और बस बम को छोडा जाने वाला ही था तभी कैमरा मैन चिल्लाया 
 आइ कैन सी द सीटी 
मतलब की अब रेडार की हेल्प नही ली जाने वाली थी इसका मतलब ये था कि नागासाकी के बचने की सम्भावना पुरी तरह से खत्म हो गई

अमेरिकी प्लेन बाक्सगार ने परमाणु बम फैटमैन को ड्रोप कर दिया ........

28,000फीट की ऊचाई से तबाही सीधे नागासाकी की तरफ आ रही थी अब कोई और रास्ता नही था

दुसरी तरफ नागासाकी शहर में कोई चेतावनी साइरन भी नही बजा क्योकि इन दो प्लेन को जो शहर पर बम भरसाने आ रहे थे उन्हे मौसमी हवाई जहाज समझा गाया

फैटमैन सीधे नीचे कि तरफ गीर राहा था दोनो प्लैन बम को ड्रोप करते ही घुम गये ताकि बम के खतरनाक इफ्केट से बचा जा सके

कुछ ही पलो बाद धरती से ऊपर पर एक जोरदार धमाका हुआ

फैटमैन फट चुका था

  ये बम बेखौफ जनता पर आफत की तरह टुटा
सिर्फ सेकण्ड् के दसवे हिस्से में इसने 22 किलोटन डिएनटी जितनी ऊर्जा पैदा की, तापमान आचानक से 4000℃ तक चला गाया , 1000 किलोमीटर की स्पीड से हवाये चल उठी

इस धमाके ने एक खतरनाक शौक वेव पैदा की जिसने 50किलोमीटर के हिस्से को कंपा दिया 

 सिर्फ कुछ पलो में 40% नागासाकी मलबे में बदल गाया

इन्सानी शरीर जो 50℃ गर्मी भी नही झेल सकता वो 4000℃ में कैसे सरवाईव करता 
40,000 लोगो का शरीर तुरन्त भाप बन कर ऊड गाया ठीक वैसे ही जैसे पानी की भाप बन जाती है
एक लगभग गल चुका कंकाल

उन लोगो कि खोपडीया जिनका शरीर भाप बन कर उठ गया


पीछे बची तो सिर्फ उनकी लगभग गल चुकी हड्डीया 

जो लोग भाप नही बन पाये उनका शरीर तुरन्त ही कार्बन में बदल गाया......उस समय उनके शरीर और एक जली हुई लकडी में अन्तर करना नामोनकिन था



1000 किलोमीटर की स्पीड वाली हवाओ ने सारे घरो को मलबे में बदल दिया पुरा नागासाकी के बडे कब्रगाह मे तब्दील हो गाया


जिन लोगो पर वो फ्लैश सिधी नही भी गिरी उन लोगो का शरीर भी जल गाया और सारी खाल शरीर से ऊतर गई बिल्कुल पानी की तरह.



जो लोग उस धमाके को झेल गये वो आगे आने वाले दिनो में रेडियशन से मारे गये कुल मिलाकर मरने वालो कि संख्या लाखों मे चली गई

इस भायवह दिन को देखने के बाद हर कोई कांप जाता हर किसी की रूह रो पडती लेकिन उस भायनकता को देखकर लगभग हर को सहम गाया चारो और मलबा और लाशो का अम्बार लग गाया था 


जापान ने इसके पाचं दिन बाद कपने हथियार डाल दिये और इसी के साथ दुसरा विश्व युध्द खत्म हो गाया लेकिन जिन लोगो ने उस दिन को देखा वो आज भी मरते हुये जी रहे है जापान में उन लोगो सज समाजिक सम्बन्ध टुटे हुये है  उनसे शादि नही कीं जाती।       

इस बम की आपदा खत्म होने में अभी भी सालो लगेंगे

आज दुनिया के नौ देश ये हथियार रखते है जिसमें पाकिस्तान और नार्थ कोरिया जैसे देश भी है इन बमों की ताकत फैटमैन से कहीं ज्यादा हैं

सांइस तब तक बेहतर है जब तक सही तरह से युज की जाये ......


.......................❕❕
👋👋👋बाय बाय

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Written by: Simmi chauhan
Edited by: Simmi chauhan


©This article is subject of copyright

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