The Science Stream Junction™ published
■■■अखिर! हम है क्या?■■■
हम जब से पैदा हुये तभी से से सुनते आये है ये कुत्ता है , वो बन्दर है। ये मछली है , वो चिडीया। मे गरीब हुँ तुम अमीर हो। मे काला हुँ तुम गोरे हो।
कहने का मतलब ये है हम कुछ ना कुछ difference ढुढ लेते है comparison करने का पर physics क्या कहती है इस topic पर
चलिऐ ढुढते हैं
भारी से भारी और modern मशीनो से भरा पडा एक कमरा , एक आदमी उन सब मशीनो से झुझता हुआ उस खोज के बहुत पास था जो ये बताती कि अखिर इनसान बना किस चीज का है
धीरे धीरे वो उस moment के करीब जा पहुचा और अखिर मे जब result उसके सामने आया तो वो चौंक ऊठा.
पता चला इनसान तो कार्बन, आक्सीजन जैसे तत्वो से मिलकर बना है और इसी पल के साथ इनँसानो का वो गरुर टुट गाया जिसके बल पर वो खुद को सबसे unique समझता था
अब सवाल ये आया कि हमे बनाने वाले वो तत्व आये कहा से! इसका जवाब था सुरज कि राख!!!!!
दरासल जब एक तारा( सुरज भी एक तारा है) बुढा होकर फटा तो अपने अन्दर कि सारी चीजे उसने अंतरिक्ष बिखरा दि और उसी बची खुची चिजो से हम बने।
लेकिन उन लोगो कि तो पुरी दुनिया ही उजड ग ई जो खुद को आसमान से टपका हुआ मानते थे
Scince ऐसी ही होती है
और सिर्फ हम नही सब के सब जैव प्राणी इस ही चीज़ से बने हैं
अगर आप के पास एक अनोखा चस्मा हो जो माइक्रो पार्ट भी आप को दिखा सके तो आप को एक अजीब और intersting पैटर्न मिलेगा
आप पाएंगे कि आप सब एक ही टाइप के electron, proton, न्यूट्रॉन से मिलकर बने हे हम सब चाहे cat हो dog हो cow हो या हम हो
बस अंतर है तो सजावट का atoms की सजावट का, जैसे चार रंगों के ऊंन का use करके माँ कई सारी अलग जर्सी बना देती है ठीक वैसे ही इन एटम्स को अलग अलग type से जोड़ कर हम बनाए गए ,
शायद इस ही लिये लिखा गया है की पूरी दुनिया हमारी अपनी है बलकुल अपने परिवार जैसी