The science stream junction™ published
मैं कल अपनी छत पर थी बगल वाले घर का वाटर टैकं ओवर लेवल होकर पानी को बहार निकालने लगा.......ये नजारा आम हैं आप सभी ने कई बार देखा होगा ओर लगभग हम मैं से हर किसी के लिऐ ये आम घटना हैं लेकिन विज्ञान का इस्तेमाल इस normal.दिखने वाली घटना को भी कितना interesting बना देता हैं.........
आपने देखा होगा कि जब पानी ऊपर से नीचे गीरता हैं तब वो एक दुरी तक बिल्कुल एक साथ बहता हैं लगातार लेकिन बीच में उसकी शेप बदलने लगती हैं थोडी zigzag टाइप हो जाती हैं और अखिर में जब वो जमीन से टकराता हैं तब वो वो कई टुकडो में टुट चुका होता हैं....मतलब जैसा पानी पाइप से निकला था एकदम smooth वैसा वो धरती से टकराते समय नही होता......
...अब सवाल ये हैं कि क्यों पानी का अकार और शेप दोनो बदल जाती हैं जैसे जैसे वो नीचे आता हैं? और इस ही सवाल मैं ये बात छुपी हैं की क्यों वर्षा rain हमेशा बुंदो में ही होती हैं पानी यु ही सीधा क्यों नही गीर जाता..?
इस सवाल का जवाब छुपा हैं धरती मैं......जरा ध्यान दो की अगर ये ही पानी का टैंक आप चादं पर रख दें तो ये ही पानी की धार काफी ऊचाई तक smooth ही रहेगीं..मतलब की उसके टुकडों नहीं होगें काफी ऊचाई तक नही होगें............
इशारा मिल गाया होगा आपको......
होता क्या हैं की जब पानी टैंक से निकलता हैं तब उसकी एक फिक्स ऊचाई होती हैं ओर धरती उसे अपनी तरफ खीचतीं हैं Due to gravitional force और यें बल उसकी speed गाति को बढाता हैं जैसे हम बाइक या कार को ऐक्सीलेट करते हो ठीक वैसे ही धरती पानी को ऐक्सीलेट करती हैं वैसे तो हर वो चीज जो ऊचाई से गिरती हैं धरती उसको अपनी और खीचती हैं और उसको ऐक्सीलेट भी करती हैं...पानी के साथ भी ये ही सीन होता हैं .........
धरती कीसी भी चीज को 9.8 मीं/सें^2 के rate से नीचे खीचती हैं मतलब की अगर आप हवाई जाहज से कुदें तो 1 सेकण्ड में आपकी speed 9.8 m/s हो जायेगी....बिना कुछ करे ...और अगले ही पल यह 19.6 m/s होगी और हवाई जहाज से कुदने के ओर भाई ये अगर ऐसा आपके साथ आधे घण्टे तक होता रहे तो आप 17,640मीं/सें की रफ्तार से आसमान से नीचे गीर रहे होगें मतलब की आप एक सेकण्ड में 17.64 किलोमीटर चल रहे होगें....I repeat एक सेकण्ड में।
पानी के साथ कुछ ऐसा ही होता हैं लेकीन इतना खतरनाक नही होता....क्योकिं टैंक से निकल कर धरती तक पहुचने में पानी को ज्यादा से ज्यादा 2.5 - 3.5 सेकण्ड का टाइम ही मिलता हैं अब इस दौरान ही कुछ ऐसा होता हैं जो पानी को टुकडो में तोड देता हैं...........थोडा सा ध्यान देकर सुनना ......
जब पानी वाटर टैंक में से निकलता हैं तो उसे धरती खीचंना शुरू कर देती है और वो उपर दी हुई रफ्फतार से धरती की ओर खींचना शुरु हो जाता हैं लेकिन उसके बाद जो पानी निकलता है वो भी धरती की तरफ खींचना शुरु हो जाता हैं अब ध्यान दो पहले 1 सेंकण्ड में निकलने वाला पानी जब 9.8 मीं जा चुका होगा तब दुसरे सेकण्ड का पानी वाटर टैंक से निकला ही होगा.... तो पानी की शेप में खीचाव आ जाता हैं बिल्कुल वैसे ही जैसे रबर बैंन्ड में...और ये खीचावं टाइम के साथ लगातार बढता जाता हैं और finally पानी unregural shape में बहने लगता हैं लेकिन ये शेप भी एक सीमा तक ही खीचावं सह सकती हैं अगर अब भी पानी हवा में ही होता हैं तो वो बडी बडी बुदों में बदल जाता हैं जिनकी शेप गोल नही होती............. &That's how water flow chang it's shape time to time......
बरिश की बुदें काफी ज्यादा टाइम लेती हैं धरती तक गिरने में इस लिऐ वो पुरी गोल शेप मैं आ जाती हैं
....................
You may check it out In Your bathroom.
#NOT_JUST_READ_IT_BUT_FEEL_IT
Written by: SIMMI CHAUHAN
मैं कल अपनी छत पर थी बगल वाले घर का वाटर टैकं ओवर लेवल होकर पानी को बहार निकालने लगा.......ये नजारा आम हैं आप सभी ने कई बार देखा होगा ओर लगभग हम मैं से हर किसी के लिऐ ये आम घटना हैं लेकिन विज्ञान का इस्तेमाल इस normal.दिखने वाली घटना को भी कितना interesting बना देता हैं.........
आपने देखा होगा कि जब पानी ऊपर से नीचे गीरता हैं तब वो एक दुरी तक बिल्कुल एक साथ बहता हैं लगातार लेकिन बीच में उसकी शेप बदलने लगती हैं थोडी zigzag टाइप हो जाती हैं और अखिर में जब वो जमीन से टकराता हैं तब वो वो कई टुकडो में टुट चुका होता हैं....मतलब जैसा पानी पाइप से निकला था एकदम smooth वैसा वो धरती से टकराते समय नही होता......
...अब सवाल ये हैं कि क्यों पानी का अकार और शेप दोनो बदल जाती हैं जैसे जैसे वो नीचे आता हैं? और इस ही सवाल मैं ये बात छुपी हैं की क्यों वर्षा rain हमेशा बुंदो में ही होती हैं पानी यु ही सीधा क्यों नही गीर जाता..?
इस सवाल का जवाब छुपा हैं धरती मैं......जरा ध्यान दो की अगर ये ही पानी का टैंक आप चादं पर रख दें तो ये ही पानी की धार काफी ऊचाई तक smooth ही रहेगीं..मतलब की उसके टुकडों नहीं होगें काफी ऊचाई तक नही होगें............
इशारा मिल गाया होगा आपको......
होता क्या हैं की जब पानी टैंक से निकलता हैं तब उसकी एक फिक्स ऊचाई होती हैं ओर धरती उसे अपनी तरफ खीचतीं हैं Due to gravitional force और यें बल उसकी speed गाति को बढाता हैं जैसे हम बाइक या कार को ऐक्सीलेट करते हो ठीक वैसे ही धरती पानी को ऐक्सीलेट करती हैं वैसे तो हर वो चीज जो ऊचाई से गिरती हैं धरती उसको अपनी और खीचती हैं और उसको ऐक्सीलेट भी करती हैं...पानी के साथ भी ये ही सीन होता हैं .........
धरती कीसी भी चीज को 9.8 मीं/सें^2 के rate से नीचे खीचती हैं मतलब की अगर आप हवाई जाहज से कुदें तो 1 सेकण्ड में आपकी speed 9.8 m/s हो जायेगी....बिना कुछ करे ...और अगले ही पल यह 19.6 m/s होगी और हवाई जहाज से कुदने के ओर भाई ये अगर ऐसा आपके साथ आधे घण्टे तक होता रहे तो आप 17,640मीं/सें की रफ्तार से आसमान से नीचे गीर रहे होगें मतलब की आप एक सेकण्ड में 17.64 किलोमीटर चल रहे होगें....I repeat एक सेकण्ड में।
पानी के साथ कुछ ऐसा ही होता हैं लेकीन इतना खतरनाक नही होता....क्योकिं टैंक से निकल कर धरती तक पहुचने में पानी को ज्यादा से ज्यादा 2.5 - 3.5 सेकण्ड का टाइम ही मिलता हैं अब इस दौरान ही कुछ ऐसा होता हैं जो पानी को टुकडो में तोड देता हैं...........थोडा सा ध्यान देकर सुनना ......
जब पानी वाटर टैंक में से निकलता हैं तो उसे धरती खीचंना शुरू कर देती है और वो उपर दी हुई रफ्फतार से धरती की ओर खींचना शुरु हो जाता हैं लेकिन उसके बाद जो पानी निकलता है वो भी धरती की तरफ खींचना शुरु हो जाता हैं अब ध्यान दो पहले 1 सेंकण्ड में निकलने वाला पानी जब 9.8 मीं जा चुका होगा तब दुसरे सेकण्ड का पानी वाटर टैंक से निकला ही होगा.... तो पानी की शेप में खीचाव आ जाता हैं बिल्कुल वैसे ही जैसे रबर बैंन्ड में...और ये खीचावं टाइम के साथ लगातार बढता जाता हैं और finally पानी unregural shape में बहने लगता हैं लेकिन ये शेप भी एक सीमा तक ही खीचावं सह सकती हैं अगर अब भी पानी हवा में ही होता हैं तो वो बडी बडी बुदों में बदल जाता हैं जिनकी शेप गोल नही होती............. &That's how water flow chang it's shape time to time......
बरिश की बुदें काफी ज्यादा टाइम लेती हैं धरती तक गिरने में इस लिऐ वो पुरी गोल शेप मैं आ जाती हैं
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You may check it out In Your bathroom.
#NOT_JUST_READ_IT_BUT_FEEL_IT
Written by: SIMMI CHAUHAN
