Wednesday, 12 April 2017

On 400km. Above

The science stream junction™ published





धरती से 4,00,000 मीटर की ऊचाई पर एक मानव निर्मित सबसे बडी मशीन space  में धरती के चक्कर लगा रही हैं नासा ने यह उपग्रह 2000 में अंतरिक्ष में भेजा था और तभी से यहाँ पर space research के काम चल रहे हैं .......... और इस ही satellite में होता हैं धरती के खीचांव के बिना जीवन जीने का खेल .......

यहाँ जाकर आप पर कोई खीचांव.काम नही करता मतलब.की आप हवा में जब तक चाहते हो तब तक ऊडते रह सकते हो... उल्टे लटक सकते है और ऐसे ही बहुत देर तक रह सकते हो...धरती को एक दिन में 24 बार घुमते हुऐ देख सकते हो... बिना कीसी सहारे के आप हवा में लटक सकते हो....नीचे की तस्वीरो में आप देख सकते हो कि कैसे international space stationमें लोग मजे करते हैं....

        अगर अब भी किल्यर नही हुआ की कैसे वो लोग जीते हैं तो यहाँ पर किल्क कर के 30 सेकण्ड की विडीयों देख सकते हैं....

      लेकिन एक बुनयादि सवाल......ऐसा होता क्य़ों हैं why this stupid things happen😋😋😋

मतलब की वहां लोग हवा में ही क्यों ऊडते रहते हैं.....नीचें क्यों नही गीर जातें

      इसका एक सीधा सा जवाब हैं जो हमें स्कुल कालेजो में बताया जाता हैं और हमारें आकडें कहते हैं कि.100 में से 95 लोग  मानते हैं कि वहाँ ये सब इस वजह से होता हैं क्योकि वहा gravity नही हैं........are you kidding me....😊😊😊😊

  जब पहली बार मुझे इस की जानकारी हुई तो मैं अपने Teacher से agree कर गाया लेकिन...बात कुछ जमी नहीं थीं क्यों ? क्योकि धरती से 6,400 किलोमीटर की हाइट पर earth gravity  की valug/4 होती हैं मतलब 0 नही होती..... तो जब 6,400 की ऊचाई पर 0 नहीं होती तो मेरे भाई 400 कि हाइट पर जीरो कैसे हो गई g की  value. Actually एक बडा़ ही simple formula हैं धरती की ऊचाई से ग्रेवीटी को मापने का और वो formula हैं
 अब ऊपर वाले formula में 
g=9.8m/s^2 
R=6400km.
h=कोई भी वो हाइट.जी पर तुम्हें g की वैल्यु निकालनी हैं

 बस गुणा भाग करते रहो तो तुम्हे पता लग जायेगा की टीचर्स ने तुम्हे कितना बडा धोखा दिया........ क्योकिं 400 किमीं की हाइट पर earth gravity की वैल्यु 0 नही बल्कि 8.68 होती हैं  जो धरती की वैल्यु से सिर्फ 1.2 ही कम हैं  & that is not a big change ......... अब इसका मतलब क्या हुआ ?

मतलब अगर मान लो हमनें एक 400 किमीं की हाइट पर एक इमारत बना (जो की हो नहघ सकता पर फीर भी ) ली तो उसकी चोटी पर जो 400 किमीं की हाइट पर हैं हम लगभग वैसे ही घुम सकते हैं जैसे धरती पर। तो ऐसा क्या की उस ही हाइट पर एक satellite में मौजुद लोग हवा में तैर रहे हैं उन्हे खीचावं महसुस नही हो रहा और वो कलाबजीया खा रहें हैं और उस ही हाइट.पर तुम बैठे हुऐ हो ठीक वैसे ही जैसे धरती पर तुमने ऊडने की कोशीश करी तो तुरन्त नीचे पटक दिये जाओगें...... लेकिन ये भेदभाव क्यों...

.......... तो जब धरती के 400 किलो मीटर की ऊचाईं पर गुरूत्वाकर्षण का मान शुन्य नही हैं तो क्यों वहां के लोग ऊडते रहते हैं

Actually बडी ही चलाकी से साइंस का युज किया गाया हैं इस मामले मैं ........

           जरा सोचो अगर तुम एक लिफ्ट में हो और उस लिफ्ट के स्पोर्ट अचानक से टुट जायें और तुम सीधे नीचे गीर रहे हो ...... कैसा फील होगा तुम को......
ऐसा ही जैसा अंतरिक्ष यात्रीयों को महसुस होता हैं 

     In reality ISSधरती के चारो और घुम नहीं रहा हैं बल्कि वो धरती की तरफ गीर रहा हैं लेकिन उसके गीरने के गति इतनी तेज ह़ै की वो जब तक धरती के surface तक पहुच़े इससे पहले ही वो धरती की दुसरी तरफ घुम जाता हैं  और ऐसा लगातार होता रहता हैं वो आता रहता हैं जाता रहता हैं और हम को लगता है की वो गोल गोल घुम रहा हैं ......... In easy words

इस incident  को समझाने के लिऐ एक छोटा सा काम आप कर सकते हैं।  एक पत्थर उठाऔ और उसको थोडी सी जान लगा कर सीधा फैकों.......वो कीतनी दुरी जायेगा
जैसा figure में हैं अगर तुम 10m/s. speed  से फेकोगें की तो वो धरती के ऊपर 8.55mदुरी चलेगा.
अब अगर तुम100m/sस्पीड बढाऔ तो वो 855m. दुरी जायेगा
और बढाऔ तो वो 1800m दुरी जायेगा(30° angle पर)

     अगर तुम अपनी speed v=4.4km/s कर दो तो अगर तुम उस INDIA से फेकोगें तो वो जा कर गिरेगा America में ....वो स्पीड किलोमीटर पर सेकेन्ड में हैं किलोमीटर पर घण्टे में नहीं। ध्यान रखना

  और स्पीड बढाने पर ये गैप बढता चला जायेगा और एक स्पीड पर जब v=8.8km/s हो जायेगा तो उसकी स्पीड इतनी तेज होगी की वो गिरेगा ही नही गोल गोल चक्कर ही निकालता रहेगा..... और ये ही काम वो सैटेलाईट कर राहा हैं उसकी स्पीड 27,000 किलोमीटर/घण्टा हैं.........और हमे लगता हैं वो घुम राहा हैं.........

हम चाहे तो धरती के सरफेस पर रह कर भी वो भारहीन वाली situation feel कर सकते हैं अगर हम 9.0 किलोमीटर सेकन्ड के दर से उडे तो आप भी कभी धरती के सरफेस को नही छु पायेगें और हमेशा ऊडते ही रहेगें...(हमेशा नही बस कुछ ही देर के लिऐ क्योकि धरती पर मौजूद हवा हमें जला कर राख कर देगीं)....

और इस ही लिऐ वो उपग्रह 400 किलोमीटर की हाइट पर लागाया गाया हैं ताकि हवा में वो जल ना जायें.......

अब एक सवाल ये भी हैं कि क्यों धरती के 400 किलोमीटर की ऊचाई पर हवा नहीं हैं....



...................और इस वजह से #Do_not_read_it_feel_it


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